
डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं और बच्चा वेंटिलेटर पर है। परिजन इलाज में कोल्ड्रिफ’ सिरप दिए जाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं सीएमएचओं ने जांच के लिए चार डॉक्टरों की समिति गठित की है। परासिया के डॉ. ठाकुर को दिखाया था गंभीर रूप से बीमार बच्चे की पहचान हर्ष, पिता राकेश, निवासी ग्राम टीकाबर्री (आमला खंड, बैतूल) के रूप में हुई है। बच्चे के फूफा नीलेश ने बताया कि 4 अक्टूबर को नागपुर के अजनी स्थित मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत पहले दिन जैसी ही बनी हुई है और डॉक्टरों ने कोई सकारात्मक उम्मीद नहीं जताई है। नीलेश के अनुसार, 26 सितंबर को परासिया के डॉ. ठाकुर को हर्ष को दिखाया गया था। वहां पर्ची पर लिखी गई दवाएं दी गईं। लेकिन 1 अक्टूबर तक बच्चे की हालत बिगड़ गई। 2 अक्टूबर को बैतूल के दो निजी अस्पतालों में भी दिखाया गया, जहां से उसे बाहर ले जाने की सलाह दी गई। 4 अक्टूबर को नागपुर ले जाया गया, जहां बच्चे का क्रिएटिनिन लेवल 250 mg पाया गया। नीलेश ने इलाज से जुड़ा पर्चा और कथित तौर पर दी गई ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप की शीशी का फोटो भी साझा किया है। डेढ़ माह के एक और बच्चे की मौत इस बीच, हरन्या पंचायत निवासी आदिवासी युवक मोहित धुर्वे के डेढ़ महीने के बेटे भानु की भी मौत 30 सितंबर को हो गई। बच्चे को सर्दी-खांसी की शिकायत पर 29 सितंबर को परासिया के डॉ. ठाकुर के पास ले जाया गया था। अगले दिन उसने दम तोड़ दिया। मोहित के अनुसार, भानु को Traxol इंजेक्शन, Acolate नेजल स्प्रे, और Wikoryl ओरल ड्रॉप दी गई थीं। हालांकि उनके पास ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच इस मामले पर सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े ने बताया कि मृतक भानु के पिता मोहित के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि टीकाबर्री के हर्ष के नागपुर में भर्ती होने की विस्तृत रिपोर्ट भी मंगवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए गठित चार डॉक्टरों की समिति अब तक बैतूल में मृत दोनों बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज कर चुकी है। अभी हमीदिया और एम्स भोपाल से रिपोर्ट आना बाकी है।