800 बिस्तर के अस्पताल में 3 नई लिफ्ट शोपीस, रैंप से 4 मंजिल चढ़ने की मजबूरी

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संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों की सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की पोल खुल रही है। 800 बिस्तर वाले इस अस्पताल में तीन नई बड़ी लिफ्टें लगने के बावजूद उन्हें चालू नहीं किया गया है, जिसके कारण पूरा लोड सिर्फ एक पुरानी पेशेंट लिफ्ट पर आ गया है। ऐसे में स्ट्रेचर वाले मरीजों को जान जोखिम में डालकर रैंप के सहारे चार मंजिल तक चढ़ना पड़ रहा है। जो एक लिफ्ट चल रही है, यदि वह भी किसी दिन बिगड़ गई तो यहां हाहाकार मच जाएगा। मेडिकल कॉलेज का यह अस्पताल चार मंजिला है। जहां मरीजों को भर्ती करने, जांच कराने या सर्जरी के लिए ले जाने हेतु स्ट्रेचर का इस्तेमाल होता है। यह सारा काम केवल एक लिफ्ट के भरोसे है। अस्पताल में दो छोटी लिफ्टें (डॉक्टरों और अटेंडरों के लिए) हैं, लेकिन स्ट्रेचर वाले मरीजों
के लिए ये काम की नहीं हैं।
ओपीडी के दौरान यहां भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि एकमात्र लिफ्ट में भारी लाइन लगती है। समय पर इलाज तक पहुंचने की हड़बड़ी में अटेंडर मजबूरन स्ट्रेचर को रैप से घसीटते हुए ऊपर ले जाते हैं। गंभीर बीमारियों या चोटों वाले मरीजें के लिए यह कवायद कठिन हो जाती है। उनकी स्थिति और बिगाड़ सकती है।

प्रबंधन की अनदेखी से यह स्थिति

पुरानी लिफ्टों को बदलकर तीन नई बड़ी लिफ्ट लगाई गई हैं। यह कार्य खनिज मद की निधि से स्वीकृत किया गया था। लेकिन प्रबंधन की अनदेखी के चलते ये नई लिफ्ट आज भी केवल शोपीस बनकर खड़ी हैं। राशि की भुगतान न होने से कार्य पूरा होने के बावजूद मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
लिफ्ट की कमी का असर हर मंजिल पर देखा जा रहा है। भू-तल से लेकर चौथी मंजिल तक लिफ्ट के बाहर स्ट्रेचर में मरीजों को लिए परिजन इंतजार करते देखे जा सकते हैं।

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