अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर तेज़ हो गया है। चीन ने अमेरिकी जहाजों पर शुल्क बढ़ाया, जबकि अमेरिका ने 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एलान किया। इसके जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स और संवेदनशील सामग्रियों पर निर्यात नियंत्रण कड़ा किया। ट्रंप सरकार ने प्रस्ताव रखा कि रूस के एयरस्पेस से अमेरिका आने वाले चीनी विमानों पर रोक लगाई जाए, जिससे चीनी एयरलाइंस को ऑपरेशनल लागत, टिकट दरों में वृद्धि और रद्द उड़ानों के कारण आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इस कदम से अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना है।
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अंतरराष्ट्रीय विमानन पर असर:
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अगर प्रस्ताव लागू हुआ, तो चीनी एयरलाइंस को ट्रांस-पैसिफिक रूट बदलने पड़ेंगे।
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इससे टिकट दरें बढ़ सकती हैं और यात्रियों को मुआवजा देना पड़ सकता है।
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वैश्विक सप्लाई चेन पर प्रभाव:
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चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर नियंत्रण से टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
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अमेरिका और अन्य देशों में इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों में वृद्धि संभव।
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राजनीतिक तनाव:
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ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच शीत युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
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दोनों देशों की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार नीतियों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
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वित्तीय बाजार पर असर:
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स्टॉक मार्केट में अमेरिकी और चीनी कंपनियों के शेयर प्रभावित हो सकते हैं।
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एयरलाइन और टेक्नोलॉजी कंपनियों में अस्थिरता की आशंका।
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अगले कदम:
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अमेरिका की योजना के अनुसार, प्रस्ताव का कार्यान्वयन आर्थिक और राजनीतिक दबाव के लिए किया जाएगा।
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चीन अपनी निर्यात नीति और एयरलाइंस रूट रणनीति में बदलाव कर सकता है।
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