विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकले, नारे नहीं नीति पर दे जोर- PM मोदी

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नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र की आज यानी सोमवार से शुरुआत हो रही है. कार्यवाही शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकले. वो नारे नहीं, नीति पर जोर दे. पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र को जिया है. इसके उमंग उत्साह को समय-समय पर ऐसे प्रकट किया है कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास बढ़ता जाता है. बिहार में मतदान में भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत रही. बिहार में माताओं-बहनों की भागीदारी इसकी मजबूती को दिखाती है. भारत ने सिद्ध कर दिया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवर.

पीएम मोदी ने कहा, भारत की अर्थव्यवस्था विकसित भारत की ओर ले जाने में नई ताकत देती है. ये सत्र संसद देश के लिए क्या सोच रही है, क्या करने वाली है इन मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहली बार चुनकर आए या छोटी आयु के सभी संसद बहुत परेशान और दुखी हैं. उन्हें अपने समर्थ का परिचय करने का अवसर नहीं मिल रहा. उन्हें अपने क्षेत्र की समस्या को बताने का मौका नहीं मिल पा रहा. नए सांसदों को अवसर देना चाहिए. उनके अनुभवों से राष्ट्र को लाभ मिलना चाहिए.

पीएम मोदी ने कहा, विपक्ष अपने मुद्दे उठाए. पराजय की निराशा से बाहर निकले. एक दो दल तो ऐसे हैं कि पराजय को पचा नहीं पा रहे. संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनाना नहीं चाहिए. विजय के अहंकार में भी लोगों को नहीं आना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रामा करने के लिए जगह बहुत है. यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी चाहिए. पूरे देश में जाकर नारे लगाए. यहां नारा नहीं नीति पर बल देना चाहिए. नेगेटिविटी को अपने मर्यादाओं में रखकर नेशन बिल्डिंग में लगाए. बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा. लोकसभा ने चर्चा के लिए 10 घंटे आवंटित किए हैं.

<img src=”blob:https://web.whatsapp.com/edcf0b09-c9ea-4a9d-8f34-68209e3cc1e9″ alt=”विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकले, नारे नहीं नीति पर दे जोर- PM मोदी

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र की आज यानी सोमवार से शुरुआत हो रही है. कार्यवाही शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकले. वो नारे नहीं, नीति पर जोर दे. पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र को जिया है. इसके उमंग उत्साह को समय-समय पर ऐसे प्रकट किया है कि लोकतंत्र के प्रति विश्वास बढ़ता जाता है. बिहार में मतदान में भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत रही. बिहार में माताओं-बहनों की भागीदारी इसकी मजबूती को दिखाती है. भारत ने सिद्ध कर दिया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवर.

पीएम मोदी ने कहा, भारत की अर्थव्यवस्था विकसित भारत की ओर ले जाने में नई ताकत देती है. ये सत्र संसद देश के लिए क्या सोच रही है, क्या करने वाली है इन मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहली बार चुनकर आए या छोटी आयु के सभी संसद बहुत परेशान और दुखी हैं. उन्हें अपने समर्थ का परिचय करने का अवसर नहीं मिल रहा. उन्हें अपने क्षेत्र की समस्या को बताने का मौका नहीं मिल पा रहा. नए सांसदों को अवसर देना चाहिए. उनके अनुभवों से राष्ट्र को लाभ मिलना चाहिए.

पीएम मोदी ने कहा, विपक्ष अपने मुद्दे उठाए. पराजय की निराशा से बाहर निकले. एक दो दल तो ऐसे हैं कि पराजय को पचा नहीं पा रहे. संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनाना नहीं चाहिए. विजय के अहंकार में भी लोगों को नहीं आना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रामा करने के लिए जगह बहुत है. यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी चाहिए. पूरे देश में जाकर नारे लगाए. यहां नारा नहीं नीति पर बल देना चाहिए. नेगेटिविटी को अपने मर्यादाओं में रखकर नेशन बिल्डिंग में लगाए. बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा. लोकसभा ने चर्चा के लिए 10 घंटे आवंटित किए हैं.” />

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